

“जहाँ गीत और पुराण एक ही बात दोहराते हैं” कुछ गीत केवल सुने नहीं जाते, वे स्नायुतंत्र में रच-बस जाते हैं। कुछ श्लोक केवल बोले नहीं जाते, वे संस्कार बनकर पीढ़ियों में उतरते हैं। मेरे जीवन में एक गीत और एक श्लोक का मिलन कुछ ऐसा ही रहा—जैसे खेत की मेड़ पर खड़ा कोई किसान अचानक देखे कि आसमान का रंग और मिट्टी का रंग एक हो गया है। हमारी परवरिश उस भारत में हुई थी, जो नक्शे में कम और हल क…



