गोपेश्वर: तप्तकुंड में लगातार डुबकी लगाने से बचें, बुजुर्गों के लिए बढ़ सकता है जान का खतरा; डॉक्टरों की सलाह !

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चिकित्सकों के अनुसार, कुंड में प्राकृतिक रूप से निकलने वाले सल्फरयुक्त गर्म पानी में ज्यादा देर तक स्नान करना घातक हो सकता है। इससे चक्कर आने, मूर्छा आने और हृदय संबंधी परेशानी का खतरा बढ़ता है।

बदरीनाथ धाम स्थित तप्तकुंड में आस्था की डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। चिकित्सकों के अनुसार, कुंड में प्राकृतिक रूप से निकलने वाले सल्फरयुक्त गर्म पानी में ज्यादा देर तक स्नान करना घातक हो सकता है। इससे चक्कर आने, मूर्छा आने और हृदय संबंधी परेशानी का खतरा बढ़ता है।

 

बदरीनाथ के सरकारी अस्पताल के प्रभारी डॉ. सचिन राणा ने बताया कि कुंड का पानी प्राकृतिक रूप से गर्म और सल्फरयुक्त है। तप्तकुंड क्षेत्र में गर्म हवाओं के कारण ऑक्सीजन का दबाव भी कम रहता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को अधिकतम दो से तीन डुबकी लगाने के बाद कुंड से बाहर आने की सलाह दी।
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स्थानीय लोग भी कुंड में अधिक देर तक नहीं रुकते हैं। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को तप्तकुंड में 108 डुबकी लगाने के दौरान दो महिलाओं की मौत हो गई थी। 71 वर्षीय रामू देवी और 63 वर्षीय प्रेमा देवी सगी बहनें थीं। वे करीब एक सप्ताह से प्रतिदिन 108 डुबकी लगा रही थीं। दोनों की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। 


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