

हरिद्वार आने के बाद सुरेंद्र कोली ने कुछ समय नौकरी की उसके बाद उसने काम छोड़ दिया और दूसरे काम की तलाश में जुट गया। जांच में सामने आया कि अब जब रोजगार के लिए चाय का खोखा मिला तो पैसे न होने से परेशानी खड़ी हो गई थी। आशंका है कि इसी वजह से आत्महत्या जैसा कदम उठाया होगा।
निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की मौत से पहले उसकी जिंदगी में आर्थिक परेशानियां लगातार बढ़ रही थीं। करीब तीन महीने पहले हरिद्वार आया सुरेंद्र यहां अपनी पहचान छिपाकर सदाराम के नाम से रह रहा था।
पहले पथरी क्षेत्र के मुस्तफाबाद में किराये पर रहा और बाद में सिडकुल की दीपगंगा सोसायटी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने लगा। कुछ समय नौकरी करने के बाद उसने काम छोड़ दिया और दूसरे काम की तलाश में जुट गया। जांच में सामने आया कि अब जब रोजगार के लिए चाय का खोखा मिला तो पैसे न होने से परेशानी खड़ी हो गई थी। आशंका है कि इसी वजह से आत्महत्या जैसा कदम उठाया होगा।
करीब 15 दिन पहले रोशनाबाद में 53 वर्षीय सुरेंद्र कोली की मुलाकात दिल्ली के नरेला निवासी धर्मेंद्र कौशिक से हुई थी। धर्मेंद्र के मुताबिक, सुरेंद्र अक्सर उसके दोस्त की दुकान पर सामान लेने आता था। बातचीत में उसका व्यवहार सामान्य और अच्छा था, लेकिन काम को लेकर वह काफी परेशान रहता था। कुछ दिन पहले उसने रोते हुए धर्मेंद्र से काम दिलाने की मदद मांगी थी।


